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6 वीं क्लास में फेल होने के बाद डिप्रेशन का शिकार हुई, अपने हौसले और जुनून से दूसरी रैंक हासिल कर बनी UPSC टॉपर…!

फ्रस्ट्रेशन एक ऐसा शब्द है जिसका मतलब होता है जीवन का एक ऐसा दौर जब आपके पास अपनी समस्याओं से निपटने की हिम्मत नहीं होती। लेकिन क्या यह वाकई सच है? क्या होता है जब कोई सांप आपको काटने आता है? क्या तुम चुप रहोगे और कहोगे कि मुझे काटने दो क्योंकि मुझमें इससे निपटने की हिम्मत नहीं है या तुम गोली की गति से भाग जाओगे? इसी तरह निराशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। शायद उसका सामना करना ही उसका समाधान हो सकता है।

आज हम जिस लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं वह इस बात का उदाहरण है कि निराशा किसी समस्या का समाधान नहीं है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए क्या मैदान से भागना सही है? नहीं..! मनुष्य जीवन के हर सफर में कुछ न कुछ सीखते ही रहता है। कहते हैं मुश्किलों में इंसान कुछ न कुछ करके रास्ता निकाल ही लेता है। गलतियों से इंसान को एक नई सीख मिलती है। इसलिए इंसान हमेशा कोशिश करता है कि वो गलती दोबारा न हो। ऐसी है रुक्मिणी रायर की कहानी, रह चुकी हैं यूपीएससी टॉपर

आईएएस रुक्मिणी रायर पंजाब के गुरदासपुर जिले की रहने वाली हैं, उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बलजिंदर सिंह रायर और माता का नाम तकदीर कौर है। पिता बलजिंदर सिंह सेवानिवृत्त डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं और मां तकदीर कौर गृहिणी हैं। रुक्मिणी ने अपनी स्कूली शिक्षा गुरदासपुर में ही पूरी की। चौथी कक्षा के बाद उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेजा गया। जब वह प्राइमरी स्कूल में पढ़ रही थी तब वह ठीक थी, लेकिन जब उसे बोर्डिंग स्कूल भेजा गया तो वह घर से दूर रहने का दबाव नहीं सह सकी। इस वजह से वह छठी क्लास में फेल हो गई। लेकिन उसके बाद रुक्मणी रायर ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2019 में दूसरा रैंक हासिल कर न केवल उनके आईएएस बनने के सपने को पूरा किया, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक मिसाल कायम की जो असफलताओं के कारण प्रयास करना छोड़ देते हैं। कमाल की बात यह है कि उन्होंने इस कठिन परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास कर लिया। आइए जानते हैं कि रुक्मणी रायर को इस कठिन परीक्षा में कैसे सफलता मिली।

6वीं कक्षा में फेल होने पर रुक्मिणी बहुत रोईं। एक तो वह परिवार से दूर थी और फिर परीक्षा में फेल होने के बाद डिप्रेशन का शिकार हो गई। वह शिक्षकों और परिवार के सदस्यों के सामने जाने से कतरा रही थी। लेकिन धीरे-धीरे उसने अपना ख्याल रखा और फिर तय किया कि इस परीक्षा के बाद वह कभी भी फेल नहीं होगी। रुक्मणी ने अपनी पढ़ाई पूरी मेहनत और लगन से शुरू की। वह छठी कक्षा के बाद कभी फेल नहीं हुई।

छठी कक्षा में फेल होने के बाद उन्हें अपने परिवार के सामने काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। लेकिन उसके बाद रुक्मणी रायर ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2019 में दूसरा रैंक हासिल कर न केवल उनके आईएएस बनने के सपने को पूरा किया, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक मिसाल कायम की जो असफलताओं के कारण प्रयास करना छोड़ देते हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल करने वाली रुक्मणी रायर का कहना है कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए लगन और लगन का होना बहुत जरूरी है. कक्षा 6 से 12 तक एनसीईआरटी का अच्छी तरह से अध्ययन किया जाना चाहिए। इसके अलावा बाहर की किताबों से मदद लेकर नोट्स बनाना चाहिए। यूपीएससी में टॉप कर रुक्मिणी आदर्श बनी हैं।

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